हां ये ज़िन्दगी है..

  अभी बैठना भी नही सीखा था हमने, और ये चलने लगी थी हंसना तो बाद में सीखा ये आते ही रोने लगी थी  रोते मन को धीरे धीरे हंसना सिखलाती जाती है फिर हंसने - रोने का खेल निरंतर हमसे खेलती जाती है हां ये ज़िन्दगी है.. जो मौत से मिलने जाती है।। कहती... Continue Reading →

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​आ चल ज़रा मेरे साथ चल ले..

आ चल ज़रा मेरे साथ चल ले अपने गांव से फिर मुलाकात कर ले रेंगा, चला और दौड़ पड़ा तेरा भोला सा बचपन जहां उठा पलक-पट, आंखें खोल उस दृश्य का रसपान कर ले आ चल ज़रा मेरे साथ चल ले अपने गांव से फिर मुलाकात कर ले। मैदान खेल का जहां कभी था शोर,... Continue Reading →

बरसती रात की सुबह।

ये जो सुबह की मिट्टी  गीली गीली सी है, सोंधी खुशबू हवाओं में  भीनी भीनी सी है, लगता है कुछ बादल सारी रात रोये हैं।।   ये जो ठंडी हवाएँ भीगे पत्तों से चिपकी बूंदे हटा रही हैं, ये पत्ते जो कल से कुछ  ज़्यादा ही हरे दिख रहे, लगता है कुछ बादल  सारी रात... Continue Reading →

​तेरी याद संवारी ऐसे है..

  हल्के से सूरज चमके जब ये धूप चुराते पत्ते हैं हो चाँद की आभा, हवा चले ये रातरानी सी महके  हैं झरनों से गिरती धारा से टकरा चिकनाए पत्थर हैं उन अविरल बहती नदियों की लहरों मे सिमटती कलकल हैं कंकड़ मारो तो बनता जाता  दायरा तालाब मे जैसे है इन रगों मे सिमरी... Continue Reading →

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